मिशन चंद्रयान -2 के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक, इसरो आज तीन-सेकंड डी-ऑर्बिट पैंतरे का आयोजन करेगा. सुबह 9.00 से 10.00 बजे के बीच विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का पीछा छोड़ नई कक्षा में जाएगा. तब यह 109 किमी की एपोजी और 120 किमी की पेरीजी में चांद का चक्कर लगाएगा. इसे वैज्ञानिक भाषा में डिऑर्बिट कहते हैं यानी जिस दिशा में वह जा रहा था, उसके विपरीत दिशा में आगे बढ़ना. ऑर्बिटर से अलग होने के बाद विक्रम लैंडर 2 किमी प्रति सेकंड की गति से ही चांद के चारों तरफ ऑर्बिटर के विपरीत दिशा में चक्कर लगाएगा. ऐसा इसलिए किया रहा हैं क्योंकि ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ ऊपर 100 किमी की दूरी पर चक्कर लगाएगा. लेकिन, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाने के लिए विक्रम लैंडर को अपनी दिशा बदलनी होगी. इसलिए उसे विपरीत दिशा में चांद का चक्कर लगाना होगा.
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