सागर। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोमवार को सागर जिले की सुरखी विधानसभा के बिलहरा में बीजेपी प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया। संबोधन के दौरान एमपी के मुख्यमंत्री पद से उनकी विदाई का दर्द छलक आया। उमा 2003 में सीएम बनी थी, लेकिन 2004 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। चुनावी सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं बीजेपी की नेता चुनी गई थी, तब इस तरह बिसलरी की बोतलें नहीं हुआ करती थी। न ही होटलों में खाना-रुकना होता था। धूल फांकनी पड़ती थी। सड़कों पर धक्के खाते हुए हमने यात्राएं की हैं। तब जाकर तपस्या से सत्ता हासिल हुई थी। मुझे सरकार से निकाला नहीं गया था। कोई भी माई का लाल मुझे निकाल नहीं सकता। किसी ने मां का दूध नहीं पिया की मुझे निकाल दे। मैंने खुद तिरंगे की शान के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ा।
उमा ने शिवराज सिंह चौहान को खुद से बेहतर मुख्यमंत्री भी बताया। उन्होंने कहा कि मेरे बाद शिवराज सिंह ने मुझसे बेहतर तरीके से सरकार चलाई। मुझ में संयम और धैर्य की कमी है। मैं तुरंत दंड देने में यकीन रखती हूं, लेकिन शिवराज जी में संयम और धैर्य है। उन्होंने कहा कि फिर से शिवराज की सरकार बनी है क्योंकि कमलनाथ तो सरकार चला ही नहीं रहे थे। उनके पीछे मिस्टर बंटाधार रिमोट कंट्रोल लेकर खड़े हुए थे। ऐसे में प्रदेश का नुकसान हो रहा था। अगर कुछ दिन और उनकी सरकार चलती तो और नुकसान होता। उमा ने कहा कि कमलनाथ ने अच्छा किया कि इस्तीफा दे दिया नहीं तो विधानसभा के अंदर ही 20 से 30 और विधायक सीधा ही वहां से यहां आ जाते।
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