चंदन कुमार, आरा
आजादी के कई दशक गुजरने बाद भी बिहार के इस गांव में लोग एक अदद सड़क के लिए तरस रहे हैं। स्थिति ये है कि उन्हें अपने गांव से बाहर जाने के लिए पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में इस बार के चुनाव में उन्होंने सड़क और पुल की मांग को लेकर वोट नहीं करने का फैसला लिया है। सवाल ये है कि क्या ग्रामीणों की ओर से की जा रही ये मांग इस बार चुनावी मुद्दा बनेगा?
इस गांव में जाने को नहीं है सड़क और पुलिया
जरा गौर से इन तस्वीरों को देखिए यह है भोजपुर जिले के गण हनी प्रखंड का तीनघरवा टोला। तकरीबन 500 की आबादी वाले इस गांव की बदनसीबी देखिए यहां आने-जाने के लिए एक अलग सड़क और पुलिया नहीं है। जिसके कारण ग्रामीणों को सालभर इस पानी से गुजरते हुए आवाजाही को मजबूर हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि हों या फिर जिला प्रशासन के लोग, शायद उनकी नजरों से ये गांव काफी दूर है। यही वजह है कि आज तक इस गांव में जाने के लिए एक सड़क नहीं बन पाई।
ग्रामीणों ने किया वोट नहीं करने का ऐलान
ऐसा नहीं है कि जनप्रतिनिधि वोट मांगने नहीं जाते हैं लेकिन शायद उनका ध्यान गांव पर नहीं पड़ा तभी तो यह इलाका आज भी पिछड़ा हुआ है। हर बार चुनाव में वादे तो किए जाते हैं लेकिन फिर वह वादे करने वाले लोग उसे भूल जाते हैं। कहानी जस की तस बनी रहती है लेकिन इस बार गांव के लोग काफी सजग हैं। इसको चुनावी मुद्दा बनाकर इस बार वोट नहीं करने का मूड बना चुके हैं।
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