आरजेडी के पूर्व दलित नेता शक्ति मल्लिक की हत्या मामले में तेजस्वी और तेज प्रताप यादव नामजद अभियुक्त हैं। पूर्णिया पुलिस ने पत्नी की शिकायत पर कुल 6 लोगों को इस केस में अभियुक्त बनाया है। कानून के जानकारों का कहना है कि इस केस में पुलिस के पास अधिकार है कि वह किसी को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। साथ ही मृतक के वायरल वीडियो से भी स्पष्ट है कि हत्या के पीछे एक मोटिव है। लेकिन बिहार पुलिस ने इस केस में अभी तक तेजस्वी और तेज प्रताप से पूछताछ तक नहीं की है।
जेल जा सकते हैं तेजस्वी
वहीं, पटना सिविल कोर्ट के स्पेशल पब्लिक प्रोस्क्यूटर संजय कुमार सिन्हा ने नवभारत टाइम्स.कॉम से बात करते हुए कहा कि ये सेंट्रल कॉग्निजेबल ऑफेंस है, इसमें गिरफ्तारी संभव है। आईपीसी की धारा 302 और 120बी का यह केस बनता है। हत्या पहले आरोपी ने बयान भी दिया था कि ये मेरी हत्या करवा सकते हैं। ये सीधे तौर पर आरोपी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर 302 लगता है, तो गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से परमिशन की कोई जरूरत नहीं होती है। पुलिस धीरे से आकर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के ऊपर आईपीसी की धारा 302/34 के साथ-साथ 120बी भी लागू होगी। अगर ये धाराएं लगी होंगी, तब पुलिस इन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। संजय सिन्हा ने कहा कि इस केस में एक मोटिव है। शक्ति मल्लिक से 50 लाख रुपये की मांग की जा रही थी, लेकिन वह तैयार नहीं थे। इस केस में मोटिव भी क्लियर है। संजय सिन्हा ने कहा कि तेजस्वी को सिर्फ नेता प्रतिपक्ष होने का लाभ मिल रहा है। इसमें गिरफ्तारी के लिए कोई परमिशन की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा भी भंग हो गया है, ऐसे में अब विधानसभा अध्यक्ष के परमिशन की जरूरत नहीं है। चुनाव की घोषणा होने के बाद तेजस्वी नेता प्रतिपक्ष भी नहीं हैं। अधिवक्ता ने कहा कि इस केस में पुलिस उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।
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