रुपेश कुमार झा, भागलपुर: नाथनगर विधानसभा के मध्य विद्यालय कोलाखुर्द में बनाए गए दिव्यांग मतदान केन्द्र पर दूसरे चरण में दिव्यांग वोटरों ने गजब का उत्साह दिखाया। गांव के लोग शिक्षित और समझदार हैं इसमें कोई संशय नहीं है। गांव के लोग खुद तो मतदान केन्द्र पहुंचे ही बल्कि अन्य लोगों को भी वोटिंग के लिए तैयार करते दिख रहे थे। लेकिन आप जानकर डर जाएंगे कि इस गांव की शत प्रतिशत आबादी दिव्यांग है। वहीं ये कोई दैविक प्रकोप नहीं बल्कि जिम्मेवार ओहदों पर काबिज नकारा अफसरशाही का नतीजा है। गांव की बड़ी आबादी जिस पानी की पीती है वो पानी आर्सेनिक और फ्लोराइड वाला है। सबकुछ जानते हुए भी और कोई अन्य उपाय नहीं होने से लोग इस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सालों से बंद, हैंडपंप उगलता है जहर
कोला खुर्द गांव की इतनी बड़ी आबादी में एकाएक दिव्यांगता का लक्षण मिलने के बाद बिहार सरकार में दो तत्कालीन मंत्री सुधा श्रीवास्तव और अश्विनी चौबे ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन भी किया। लेकिन ये प्लांट हाथी का दांत बन कर रह गया। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़ा हुआ है और लोग आर्सेनिक वाला पानी पीने को विवश हैं।
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वोट डालने के बाद दुर्गति से मुक्ति की आशा
आर्सेनिक और फ्लोराइड वाले पानी से तबाह कोला खुर्द गांव में लोगों ने बढ़- चढ़ कर वोटिंग की है। अधिकतर मतदाता दिव्यांग हैं और इसी वजह से मुख्य द्वार पर परिजनों के साथ आने के बाद उन्हें मतदान कर्मी और सुरक्षा कर्मी मतदान कक्ष तक व्हील चेयर पर पहुंचाते हैं। इन लोगों ने कहा कि निश्चित रूप में इस बार मतदान करने के बाद उन लोगों को आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी से मुक्ति मिलने की आस है।
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