Saturday, November 28, 2020

MP : श्योपुर में कोविड कर्मचारियों ने कामकाज किया ठप, छंटनी का कर रहे विरोध

श्योपुर
एमपी के श्योपुर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अनुबंध खत्म करने और छंटनी किए जाने के विरोध में कोविड-19 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यही वजह है कि जिले में कोरोना टेस्टिंग से लेकर पॉजिटिव मरीजों की देखभाल का काम बुरी तरह प्रभावित हो गया है। हड़ताल शुरू करने की परमिशन लेने पहुंचे कोविड19 कर्मचारियों का गुस्सा तब और बढ़ गया जब प्रशासन ने धरना की अनुमति देने में देर की है। आंदोलित कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पर जमकर हंगामा भी किया है।

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दरअसल, जिले में कोरोना संक्रमण की ड्यूटी के लिए शासन स्तर से 7 माह पूर्व अस्थायी रूप से भर्ती के गए 70 स्वास्थ्य कर्मचारी, जिनमें पैरामेडिकल स्टॉफ और चिकित्सक भी शामिल हैं। उनमें से कई कर्मचारियों का अस्थायी अनुबंध 30 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वहीं, कुछ लोगों की छंटनी भी की जा रही है। इसी को लेकर सभी कोविड19 कर्मचारी एकजुट होकर कामकाज ठप्प कर आंदोलन पर उतर आए हैं। जिला अस्पताल में ड्यूटी छोड़कर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। कर्मचारी जब धरना स्थल की मंजूरी लेने कलेक्ट्रेट पहुंचे तो वहां प्रशासन परमिशन देने में आनाकानी की तो कर्मचारियों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने जमकर बवाल काटते हुए नारेबाजी की है।

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करीब एक घंटे बाद एसडीएम की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ लेकिन कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कोविड-19 कर्मचारियों के काम बंद करने के बाद जिला चिकित्सालय सहित सभी अस्पतालों में कोरोना की टेस्टिंग, मरीजों की खोज और पॉजिटिव मरीज की देखभाल के कार्य लड़खड़ा गया है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के पसीने छूट रहे हैं और वैकल्पिक रूप से कोरोना कार्य सुचारू रखने की कोशिशों में जुट गए हैं। कोविड-19 स्टॉफ का कहना है कि शासन हमें नियमित करे या संविदा में संविलयन किया जाए। हम लोगों ने जान जोखिम में डाल कर कोरोना में सेवाएं दी हैं लेकिन सरकार हमें अब हटा रही है। हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी तो हम हड़ताल के बाद भूख हड़ताल भी करेंगे।

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वहीं, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन और प्रशासन के अधिकारी इसे शासन स्तर का मामला बता कर कोविड कार्य को सुचारू रूप से चलाने की कोशिश भर करने की बात कह रहे हैं। फिलहाल जिले में कोरोना का खतरा कम नहीं हो रहा है। ऐसे में कोविड-19 स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन से निश्चित ही कोरोना मरीजों की खोज और टेस्टिंग से लेकर मरीजों की देखभाल पूरी तरह से चरमरा गई है।




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