Sunday, January 31, 2021

Munger News : पीएम मोदी ने मन की बात में मुंगेर वालों के दिल में जगी उम्मीद, जानिए क्या है वो खास बात

चंचल कुमार, मुंगेर: प्रधानमंत्री के मन की बात में आज जिले के तारापुर के शहीद स्मारक की चर्चा की। ये चर्चा जिले के भाजपा नेता सह भाजपा के राष्ट्रीय मिडिया पैनलिस्टजयराम विप्लव के नमो ऐप पर की गई एक टिपण्णी के संदर्भ में थी। यहां जयराम विपल्व ने तारापुर शहीद स्मारक और उससे जुड़े तथ्यों को बताया था।

जब तारापुर के शहीदों ने दी थी अंग्रेजों को चुनौती
15 फरवरी 1932 की दोपहर तारापुर थाना भवन में झंडा फहराने के लिए क्रांतिवीरों का जत्था निकला और ये सब थाना भवन के पास जमा हो गए। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों का जत्था तिरंगा हाथों में लिए निडर होकर बढ़ता चला जा रहा था। उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जनता खड़ी होकर भारतमाता की जय, वंदे मातरम् का जयघोष कर रही थी। वहीं मौके पर थाने में कलेक्टर ईओली और एसपी डब्लू एस मैग्रेथ ने निहत्थे क्रातिकारियों पर फायरिंग का आदेश दे दिया। लेकिन क्रांतिवीर अपनी जगह पर अडिग खड़े रहे।

गोलियां खाकर भी क्रन्तिकारी दल के महावीर सिंह, कार्तिक मंडल, मदन गोपाल सिंह, त्रिपुरारी सिंह और परमानन्द झा ने थाने में तिरंगा फहरा दिया। अंग्रेजी हुकूमत की इस बर्बर कार्रवाई में 34 स्वतंत्रता सेनानी प्रेमी शहीद हो गए थे। इनमें से 13 की तो पहचान हुई बाकी 21 अज्ञात ही रह गए थे। आनन—फानन में अंग्रेजों ने कायरों जैसी हरकत करते हुए वीरगति को प्राप्त कई सेनानियों के शवों को गाड़ियों में लदवाकर सुल्तानगंज भिजवाकर गंगा में बहा दिया था।

इन सपूतों की हुई थी पहचान
जिन 13 वीर सपूतों की पहचान हो पाई उनमें रामेश्वर मंडल (पढवारा), गैबी सिंह (महेशपुर), अशर्फी मंडल (कष्टीकरी) तथा चंडी महतो (चोरगांव), विश्वनाथ सिंह (छत्रहार), संता पासी (तारापुर), झोंटी झा (सतखरिया), सिंहेश्वर राजहंस (बिहमा), बदरी मंडल (धनपुरा), वसंत धानुक (लौढिया), महिपाल सिंह (रामचुआ), शीतल चमार (असरगंज), सुकुल सोनार (तारापुर) शामिल थे। इस घटना ने अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग गोलीकांड की बर्बरता की याद ताजा कर दी थी।

पीएम के मन की बात से मुंगेर में जगी उम्मीद
वहीं मन की बात में प्रधानमंत्री ने जब तारापुर के शहीदों की चर्चा की तो आम लोगों में उम्मीद जग गई है। लोगों ने कहा कि सालों से उपेक्षित तारापुर के शहीदों को सही मायने में सम्मान नहीं मिल पाया। मगर आज प्रधानमंत्री ने इस बात की चर्चा की तो उम्मीद जगी है कि शायद अब इन शहीदों को वो सम्मान मिलेगा जिसके वो हकदार थे। आपको बता दें कि मुंगेर में आजादी के बाद से ही हर साल 15 फरवरी को तारापुर दिवस मनाया जाता है।




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