शेर ने अभी दो कदम पीछे खींचे हैं, ताकि बड़ी छलांग मार सके...तालिबान को कुछ इस अंदाज में चुनौती दी है अफगानिस्तान की एक युवा महिला नेता ने।नाम- जरीफा गफारी जो अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर रही हैं। तालिबान के कब्जे के बाद मुल्क में डर और दहशत का माहौल है। खास तौर पर महिलाएं अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हुई हैं। डर का आलम ये है कि ज्यादातर महिलाएं घर से बाहर निकलने में भी हिचक रही हैं। लेकिन जरीफा कहती हैं कि चाहे कोई भी आ जाए, पर अफगानिस्तान हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा। फिलहाल जरीफा किसी अज्ञात जगह पर हैं और पूरे दुनिया को अपने मुल्क केहालात से वाकिफ कराना चाहती हैं ताकि एक आंदोलन शुरू किया जा सके।
जरीफा का इरादा तालिबान के खिलाफ कोई हिंसक बगावत करना नहीं है। वो कहती हैं कि मेरे पास बंदूक नहीं है, पर मेरे पास आवाज है। मैं तालिबान केअसली नेताओं से बात करना चाहती हूं। हैबातुल्ला से मिलना चाहती हूं। अफगानिस्तान की हर महिला की आवाज बनकर उनसे बात करनी चाहती हूं।इसके लिए मैं पिछले सारे कड़वे अनुभव भूलने को तैयार हूं।
इसके पहले जरीफा गफारी ने बताया था कि तालिबानी, उन्हें ढूंढते हुए उनके घर आए थे और उनके हाउस गार्ड की पिटाई भी की थी। देखना होगा जफीरा के ताजा बयान पर तालिबान की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
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