चंद्रमणि कुमार, हाजीपुर
तोक्यो पैरालिंपिक में बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत ने गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया। बिहार में जन्मे और वैशाली के सुदूर देहात से आने वाले प्रमोद भगत ने इस कामयाबी को हासिल करके बिहार का ही नहीं देश का भी मान बढ़ाया है। हालांकि, उन्होंने कितने संघर्षों के बाद इस मुकाम को हासिल किया है खुद उनके परिजनों ने इसे बयां किया है।
गोल्ड मेडल विजेता प्रमोद भगत के गांव पहुंचकर एनबीटी ऑनलाइन की टीम ने उनके परिवार से बात की। दिग्गज प्लेयर की मां मालती देवी बताती हैं कि खेलों के प्रति प्रमोद का जूनून बचपन से था। पिता रामा भगत ने बताया की बचपन में ही पोलियो हो जाने के बाद इलाज के लिए प्रमोद अपनी बुआ के पास ओडिशा चले गए थे।
भाई अमोद भगत बताते हैं कि घर की गरीबी की वजह से बुआ के यहां रहना पड़ा। फूफा प्राइवेट कंपनी में ड्राइवर थे, सो यहां भी गरीबी और अभाव बरकरार था। ओडिशा में जिस जगह रहते थे पास में कुछ लड़के बैडमिंटन खेलते थे। हमारे पास रैकेट नहीं था, सो खेलने की लालसा में दोनों भाई बैडमिंटन कोर्ट की सफाई करते थे। बदले में लड़के उन्हें अपना रैकेट देते थे। इसी के बाद प्रमोद का बैडमिंटन में जुनून बढ़ा और उन्होंने ये मुकाम हासिल किया।
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