जबलपुर
जननायक अमर शहीद टंट्या भील के केंद्रीय जेल जबलपुर स्थित शहीदी स्थल से पवित्र मिट्टी खंडवा भेजी गई है। जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव की मौजूदगी में केंद्रीय जेल में आयोजित कार्यक्रम में पवित्र मिट्टी का संचयन किया गया और कलश में रखकर खंडवा रवाना किया गया। कार्यक्रम में सांसद राकेश सिंह भी मौजूद थे।
कार्यक्रम को प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव और सांसद राकेश सिंह ने संबोधित भी किया।
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स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी अमर शहीद टंट्या भील को अंग्रेज शासकों की तरफ केंद्रीय जेल जबलपुर में 4 दिसंबर 1889 को फांसी दी गई थी। अब इनके नाम पर पातालपानी रेलवे स्टेशन का नामकरण किया जा रहा है। इस मौके पर मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि इतिहासकारों ने हमारे इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। हमारे वीरों ने हर आक्रमण को विफल किया है। इसी जेल में उन्हें फांसी पर लटकाया था। मंत्री ने कहा कि इस इतिहास को भुला दिया गया था। हम पुन: इसको याद कर रहे हैं।
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जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने कहा कि टांट्या भील जीवन भर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते रहे हैं। उन्हें जो धन मिलता था, उसे अंग्रेजों में बांट देते थे। उन्हें जबलपुर सेंट्रल जेल में लाकर फांसी दी गई थी। उस स्थान से हम पवित्र मिट्टी को लेकर खंडवा जा रहे हैं। राकेश सिंह ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी को वीरों को सम्मानित कर रही है।
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गौरतलब है कि 12 साल तक अंग्रेजों से लड़ने वाले टंट्या भील जनजाति समाज के योद्धा थे। उनका जन्म 1840 में पूर्वी निमाड़ की पंधाना तहसील में हुआ था। जबलपुर सेंट्रल जेल से कलश में मिट्टी लेकर उनकी जन्मस्थली तक पहुंचाया जा रहा है। वहां उनका भव्य स्मारक तैयार किया जाएगा।
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