रायपुरः सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक मे ईपीएफओ ब्याज दर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। ईपीएफओ में मिलने वाला 8.50 ब्याज को घटाकर 8.10 कर दिया गया है। इस फैसले के बाद देशभर के करीब 6 करोड़ शासकीय कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो प्रदेश में पांच लाख से ज्यादा शासकीय कर्मचारी हैं। ईपीएफओ में कटौती से प्रदेश भर में शासकीय कर्मचारियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। आंकड़ों में समझा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रतिमाह 1500 रुपए के आस पास शासकीय कर्मचारियों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ब्याज दर में कटौती के बाद हमारे संवाददाता रोहित बर्मन ने छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों से बात की। उन्होंने नवभारत टाइम्स को बताया कि केंद्र सरकार अगर सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में लिए गए फैसले को मानती है तो छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देशभर के सरकारी कर्मचारियों को इसका भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी के दौरान पीएफ में जमा हुई पूंजी मे ब्याज दर में कटौती से भविष्य में मिलने वाली राशि पर भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्र सरकार से ब्याज दर में कटौती नहीं करने की गुजारिश की है।
छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय झा ने कहा कि केंद्र सरकार देश भर के शासकीय कर्मचारियों के साथ पीठ में छुरा भोंकने का काम कर रही है। ब्याज दर को बढ़ाने और शासकीय कर्मचारियों को मुनाफा पहुंचाने के बजाय शासकीय कर्मचारियों की जेब काटने का काम किया जा रहा है।
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