रवि सिन्हा, रांची : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) पर दुनिया भर में मातृ शक्ति को नमन किया जा रहा है। आज हम झारखंड की 5 बेटियों के संघर्ष से भी आप सभी को रूबरू कराते हैं। जन्म से ही सेरेब्रल पाल्सी की गंभीर बीमारी से ग्रस्त रांची की किक्की सिंह आज लेखन के क्षेत्र में नई ऊंचाईयों को छू रही हैं। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद कि किक्की ने बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए जब 'शादी के सपने' जैसे उपन्यास लिखने का काम किया, तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत अन्य हस्तियों ने उनका हौसला बढ़ाया। वहीं झारखंड में गरीबी और अन्य सामाजिक कारणों से बिना शादी किए लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले करीब दो हजार जोड़ों की शादी करा चुकी डॉक्टर निकिता सिन्हा आज देशभर में चर्चा में हैं।
राजधानी रांची की सड़कों पर कभी पिंक ऑटो चला कर प्रतिदिन 300-500 रुपये तक मुनाफा कमाने की जद्दोजहद में लगी कई महिलाओं की जिंदगी आज बदल गई है। पति के गुजर जाने के बाद 4 बच्चों की परवरिश करने वाली बिरसन देवी का कहना है कि डंपर चलाने से वह अपने परिवार की अच्छी तरह से परवरिश कर पा रही हैं। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रहीं झारखंड की बेटी सलीमा टेटे पर भी राज्यवासियों को गर्व है। जिन्होंने संघर्ष से इस मुकाम को पाया। झारखंड के सुदूरवर्ती पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड के एक छोटे से गांव से निकल कर तीरंदाजी के खेल में अपनी पहचान बनाने वाली नसिमा पूर्ति के संघर्ष की कहानी भी काफी दिलचस्प है। जानिए झारखंड की 5 बेटियों की कहानी।
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