Friday, March 11, 2022

Pallavi Patel Sirathu: बहू ने बेटे को हरा दिया! सिराथू में केशव मौर्य को हराने वाली पल्लवी पटेल की कहानी


Who is Pallavi Patel: यूपी में योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रच दिया। सत्ता का हर वो मिथक तोड़ा, जिनसे दूसरी पार्टियां घबराती थी। 1985 के बाद पहली बार सूबे में कोई पार्टी दोबारा सत्ता हासिल करने में कामयाब रही है। मगर इन सबके बीच एक उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सिराथू सीट से अपनी जमीन बचाने में नाकामयाब रहे। बेहद करीबी मुकाबले में वो सपा गठबंधन की पल्लवी पटेल (Pallavi Patel) से हार गए। मौर्य को 98,727 वोट मिले जबकि पल्लवी पटेल 1,05,568 यानी लगभग 7000 के अंतर के यूपी के डिप्टी सीएम चुनाव हार गए। मतगणना जब आखिरी राउंड में थी, तो केशव की हार देखते हुए उनके समर्थकों के काउंटिंग सेंटर में बवाल भी काटा। बताया जा रहा है कि इस दौरान हवाई फायरिंग और पथराव भी हुआ।

बहरहाल, सिराथू की लड़ाई को बेटा बनाम बहू का चुनाव बताया जा रहा था जिसमें बहू बाजी मार गई। तो कौन हैं पल्लवी पटेल जिन्होंने बीजेपी के दिग्गज, पार्टी के सबसे बड़े पिछड़े वर्ग के नेताओं में से एक केशव मौर्य को हरा दिया।

कौन हैं पल्लवी पटेल?
पल्लवी पटेल अपना दल (कमेरावादी) की उपाध्यक्ष हैं और कौशांबी उनका ससुराल है, जहां सिराथू सीट पड़ती है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो अपना दल हैं। एक केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (सोनेलाल) जो बीजेपी के साथ चुनावी मैदान में थी और दूसरी उनकी मां कृष्णा पटेल की अगुवाई वाली अपना दल (कमेरावादी), जो समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही थी। पल्लवी यहां से सपा के सिंपल पर ही चुनाव लड़ी थीं। अनुप्रिया पटेल ने तो इस सीट पर आकर अपनी बहन पल्लवी के खिलाफ प्रचार भी किया था, तो वहीं सपा की ओर से डिंपल यादव और जया बच्चन ने वोटरों से कहा था कि बहू की लाज रख लेना। अंतत: जनता ने बेटे के ऊपर बहू को तरजीह दी।

​दलित और पटेल वोटर बने हार-जीत के फैक्टर
सिराथू में एक लाख से अधिक दलित वोटर हैं। इसमें भी 60% से अधिक पासी हैं, जिसका साथ भाजपा को मिलता रहा है। 80 हजार के करीब मुस्लिम-यादव हैं। 25% से अधिक गैर यादव ओबीसी हैं। इनमें पटेल और मौर्य-कुशवाहा दोनों हैं। 25 हजार से अधिक ब्राह्मण हैं। बसपा ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान पर उतारा था, बावजूद इसके सपा को कोई दिक्कत नहीं हुई और एक दिलचस्प मुकाबले में पल्लवी पटेल ने मौर्य को हार का स्वाद चखा दिया।

कभी बसपा का गढ़ था सिराथू
कौशांबी की सिराथू सीट 2012 के चुनाव से पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। यहां 1993 से 2007 तक बहुजन समाजवादी पार्टी ने लगातार चार बार जीत दर्ज की थी। 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य वर्ग की हो गई। केशव प्रसाद मौर्य ने ही सबसे पहली बार 2012 के चुनावों में कमल खिलाया था। इससे पहले यहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुला था। केशव के खिलाफ बीएसपी ने यहां से मुंसब अली उस्मानी को उम्मीदवार बनाया।




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