Saturday, July 23, 2022

बिहार के बेचारे किसान क्या करें? पहले मानसून ने मारा, अब खाद की कालाबाजारी करने वाले चूस रहे खून

औरंगाबाद: सुखाड़ का डर सता रहा है, बारिश नहीं हो रही है। इसके बावजूद अन्नदाताओं ने पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान के बिचड़े तैयार कर लिए हैं। जैसे-तैसे रोपनी की तैयारी में हैं। इसके लिए उर्वरकों की जरूरत है, लेकिन कालाबाजारियों ने खाद को गधे के सिर से सिंग की भांति गायब कर दिया है। नतीजा किसानों में हाहाकार मचा है। ऐसे में रेट पर खाद पाने के लिए किसानों की नजर सहकारी संस्थाओं के उर्वरक बिक्री केंद्रों की ओर जाती है, पर यहां भी खाद के लिए मारामारी है। लंबी लाइन लगी है।

खाद के लिए घंटो लाइन में लगना पड़ रहा
आसमान आग उगल रहा है। किसान गमछे से पसीना पोछते हुए खाद के लिए लाइन में लगे हैं। औरंगाबाद में बिस्कोमान के उर्वरक बिक्री केंद्र पर खाद लेने के लिए लाइन में लगे किसानों ने बताया कि प्राइवेट उर्वरक रिटेलर निर्धारित कीमत से ज्यादा रेट पर खाद दे रहे हैं। यही वजह है कि किसान खाद पाने के लिए सहकारी संस्थाओं के बिक्री केंद्र पर निर्भर हैं, पर यहां भी भीड़ ज्यादा है।

ज्यादा रेट पर खाद देने की रसीद भी नहीं दे रहे
अहले सुबह से ही किसान खाद लेने के लिए लंबी लाइन में लग रहे हैं। बारिश नही होने से उमसभरी गर्मी में घंटों लाइन में लगने पर खाद मिल रहा है, पर यहां भी आवंटन का अभाव है। इस कारण यहां से भी उन्हें पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नहीं मिल रहा है। किसानों ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड पर खाद देना गलत है, बल्कि कृषि भूमि की रसीद पर खाद दिया जाना चाहिए, ताकि रसीद से खाद की आवश्यक मात्रा का पता चल सके।

'खाद के लिए लाइन में लगें कि शिकायत करने जाएं'
दोष सिस्टम का है, क्योंकि आधार कार्ड से खेती नहीं करने वाले लोग खाद प्राप्त कर दूसरे किसानों को बेच रहे हैं। इस वजह से किसानों में खाद लेने की होड़ मची है। किसान प्राइवेट रिटेलर के यहां जाते हैं तो वह ज्यादा कीमत पर खाद देते हैं। इसकी शिकायत करने पर कृषि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि ज्यादा कीमत पर खाद लेने की रसीद दीजिए, जो ब्लैक में बेचेगा, वह रसीद नहीं देगा और हम खाद लें कि शिकायत करने जाएं।

खाद की कालाबाजारी में प्रशासन की मिलीभगत
खाद की कालाबाजारी में प्रशासन की मिलीभगत के भी आरोप लग रहे हैं। वहीं इस मामले में जिला कृषि पदाधिकारी का जवाब अटपटा है। वह ज्यादा रेट पर खाद लेने के मामले में कहते हैं कि किसान परेशान हैं। प्रकृति की मार झेल रहे हैं। उनके पास पूंजी का अभाव है। लिहाजा वह रिटेलर से उधारी में खाद मांगते हैं जबकि सहकारी संस्थाओं से नकद में खाद मिलता है। रिटेलर जब उधारी में खाद देगा तो अधिक कीमत लेगा ही।

वहीं रिटेलर भी थोक विक्रेता से उधार में खाद लेते हैं। उधारी में उन्हें भी महंगी दरों पर खाद मिलता है। इस कारण वह भी महंगे दर पर खाद बेच रहे हैं। इसके बावजूद जो भी किसान नकद में रिटेलर से खाद खरीद रहे हैं, वे पॉस मशीन में बताई जा रही कीमत से अधिक न दे और अधिक कीमत मांगे जाने पर इसकी शिकायत करें। मतलब साफ है कि उधारी का चादर ओढ़ाकर डीएओ रिटेलरों की कालाबाजारी को जायज भी ठहरा रहे हैं और उन्हें पाक साफ भी बता रहे हैं।




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