Wednesday, December 30, 2020

सीधी
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। मंगलवार की शाम को एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि आधी रात महिला और गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई है। गुस्साए परिजनों ने जिला अस्पताल में जम कर हंगामा किया है। साथ ही डॉक्टर पर दंडात्मक कार्रवाई के लिए आवेदन दिया है।

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एमपी के सीधी जिले में डॉक्टरों की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। कल्पना नाम की गर्भवती महिला को कल डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ बबीता खरे उसकी देखभाल कर रही थी। इलाज के दौरान रात 12 बजे कल्पना गुप्ता की मौत हो गई। उसके बाद परिजन बच्चे को बचाने की अपील करते रहे लेकिन डॉक्टरों ने एक नहीं सुनी। इसकी वजह से बच्चे की भी मौत हो गई।

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परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर बबिता खरे 40 हजार रुपये की मांग कर रही थीं। लोगों ने पैसे नहीं दिए तो सही से इलाज नहीं किया है। वहीं, नीलांबर मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही से मौत हुई है या नहीं, यह जांच का विषय है। जांच के बाद जो तथ्य सामने निकल कर आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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गौरतलब है कि जिला अस्पताल में डॉक्टर की लापरवाही लगातार सामने आती रहती है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती है। अब देखना होगा कि इस मामले में कार्रवाई होती है कि नहीं।




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Rajnath Singh on Farmers Protest: किसानों को खालिस्तानी बताने वालों पर भड़के राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन लोगों की आलोचना है कि जो आंदोलन में शामिल किसानों को खालिस्तानी और नक्सली बता रहे हैं। एएनआई को दिए इंटरव्यू में जब रक्षा मंत्री से पूछा गया कि उन्हीं की पार्टी के कई नेता किसानों को खालिस्तान और नक्सली बता रहे हैं तो उन्होंने सख्त लहजे में इसे गलत बताया। राजनाथ ने कहा कि किसानों के सम्मान में उनका सिर हमेशा झुका है और किसी को किसानों के लिए इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। किसानों ने देश को हमेशा आर्थिक संकट से बचाया है और देश के लिए सिख समाज के बलिदान को कोई भूल नहीं सकता।




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झारखंड: पारंपरिक संगीत बन सकता है राज्य में रोजगार का बड़ा सेक्टर... जानिए कैसे

रवि सिन्हा, रांची: झारखंड का प्रकृति से, प्रकृति का संगीत से, और संगीत का वाद्ययंत्रों से गहरा नाता रहा है। झारखंड के लोकपर्व और सामाजिक संस्कार तो इनके बिना बिल्कुल ही अधूरे हैं। यही कारण है कि झारखंड में परंपरागत वाद्ययंत्रों की एक लंबी श्रृंखला है। यहां की संस्कृति और सामाजिक क्रियाकलापों में इनका विशेष स्थान तो है ही, रोजगार की दृष्टि से भी ये काफी महत्वपूर्ण हैं। जरूरत के हिसाब से समय-समय पर इनकी संरचना में थोड़ा बदलाव जरूर आया है लेकिन यह भी सच है कि किसी भी दौर में इसके महत्व और मांग में कमी नहीं आई। वाद्ययंत्रों के विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में करीब पांच हजार लोग पारंपरिक वाद्ययंत्र बनाने के काम में जुटे है। सरकार यदि इन्हें थोड़ी सी तकनीक आधारित प्रशिक्षण और बाजार की व्यवस्था करने में मदद करे, तो इसे रोजगार का बड़ा सेक्टर बना सकती है।

पारंपरिक संगीत का गढ़ झारखंड
सदियों से झारखंड के लोग ढोल, नगाड़ा, बासुरी, केंदरी, तबला, एकतारा, टूईला, ढाक, घन वाद्य, धमसा, भुआंग, मदनभेरी, मांदर, सानाई और सिंगा वाद्य यंत्र समेत संगीत के अन्य पारंपरिक यंत्रों को बनाने में जुटे है और अभी इन वाद्य यंत्रों को बनाकर कलाकार किसी तरह से अपनी आजीविका चला रहे है। परंतु राज्य सरकार से सहायता मिलने से पारंपरिक वाद्ययंत्र बनाने में जुटे कलाकारों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आ सकता है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बनाने में जुटे परिवारों का कहना है कि यह निर्माण कार्य वर्षा से कई दशकों से चलता आ रहा है। उस दौर मे भी, जब सीमित संसाधन थे... लोगों ने लकड़ी, बांस, मिट्टी जैसे सुलभ साधनों से कई वाद्ययंत्रों का निर्माण कर लिया और समय के साथ इनकी महत्ता बढ़ती ही गई।

कलाकारों की मांग
रांची के लापुंग क्षेत्र में ढोल और मांदर बनाने में जुटे कलाकार बताते है कि सरहुल और करमा पर्व पर उनके वाद्ययंत्रों की बिक्री अच्छी होती है, लेकिन इसे बनाने में काफी समय लगता है, इसलिए वे वर्षभर इसे बनाने में जुटे रहते हैं। हालांकि समय-समय पर इसकी बिक्री भी होती रहती है। वहीं इन वाद्य यंत्रों को बनाने में जुटे कलाकार यह भी बताते है कि यह कला उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है और यह कला ही उनके लिए रोजी-रोजगार का साधन बना है।

'कमाई से ज्यादा संस्कृति को बढ़ावा देना मकसद'
छोटानागपुर और संतालपरगना की एक बड़ी आबादी ने वाद्ययंत्रों के निर्माण को अपना पेशा बना लिया और आज भी यह इनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इन अलग-अलग वाद्ययंत्रों का इजाद कब और कहां हुआ , इस पर तो एक राय नहीं है। लेकिन, इसके निर्माण से जुड़े लोगों के लिए यह पुश्तैनी पेशा है, जिसे नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। झारखंड के कई लोक कलाकारों ने दुनियाभर मे ख्याति अर्जित की है। वाद्ययंत्रों के निर्माण मे लगे लोगों के लिए इस परंपरा को आगे बढ़ाना ही जीवन का ध्येय है। जिसे नफा-नुकसान की चिंता किए बगैर ये आगे बढ़ाए जा रहे हैं।




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Tuesday, December 29, 2020

Study in contrast: Digital divide education’s biggest test in Covid era

Anu, a Class XII student of Government Girls’ Senior Secondary School in southeast Delhi’s Madanpur Khadar, attended online classes only on weekends when her two brothers relinquished the use of her family’s pair of mobile phones. “I go through the recorded videos of the week’s classes. I don’t know whether this is enough to help me prepare for my board exams, but my parents cannot afford a third phone,” she said.

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College students panic after Goa CM talks about offline exams

There was panic among the student community right from late Monday evening and all through Tuesday after a clip of chief minister Pramod Sawant saying that first and second year college exams will be held offline went viral. There was confusion as the statement came days before the scheduled online exams are set to begin for first and second year general stream students from January 4.

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HSSC Gram Sachiv admit card 2020 to be released today at hssc.gov.in

HSSC Gram Sachiv exam will be held between January 9 to 10, 2021, at various centres. Candidates should note that the HSSC Gram Sachiv exam venue will be mentioned in the admit card.

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झारखंड: बड़े हादसे पर पड़ गई कृषि मंत्री की नजर, बीच सड़क पर उपलब्ध कराई सहायता

रवि सिन्हा, रांची: झारखंड में रामगढ़ जिले के केजिया घाटी में बुधवार सुबह बस, ट्रक और कार आपस में भिड़ गए। इस हादसे में कई लोग घायल हो गये। हादसे के वक्त राज्य के कृषि मंत्री बादल एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रांची से बोकारो जा रहे थे, उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने रूट बदल कर जाने की सलाह दी, लेकिन कृषिमंत्री ने मानवीयता का परिचय देते हुए रूट बदल कर कार्यक्रम स्थल जाने की जगह पहले दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था कराई।

कृषि मंत्री ने मौके पर उपलब्ध करवाई सहायता
प्राप्त जानकारी के अनृसार राज्य के कृषि पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल को बुधवार सुबह बोकारो कार्यक्रम में जाने के दौरान सिकीदारी घाटी में प्रशासन की ओर से रूट बदल कर दूसरे रास्ते से जाने की सलाह दी गयी। उन्हें यह जानकारी दी कि सिकिदिरी घाटी में धनबाद से आ रही नवल ट्रेवल्स की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। प्रशासन की ओर से बादल को दूसरे रूट से जाने की सलाह को मानने से इनकार करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि वे पहले दुर्घटना स्थल पर जाएंगे। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद कृषिमंत्री ने स्थानीय थाना प्रभारी, ग्रामीणों और मुखिया, प्रखंड के कार्यकर्ताओं सहित सभी लोगों से मुलाकात की और उनसे पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ली। बादल ने तुरंत रिम्स सुपरिटेंडेंट से बात कर उन्हें त्वरित चिकित्सा के लिए निर्देश दिया। बादल ने पुलिस अधीक्षक से भी बात कर थाना प्रभारी सहित ग्रामीणों की प्रशंसा की और उनसे कहा कि आने वाले दिनों में प्रशासन के द्वारा इन्हें सम्मानित किया जाएगा।




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WBCHSE semester system under review: Will West Bengal bring back annual Class 11 and 12 exams?

The West Bengal Council of Higher Secondary Education (WBCHSE) is reviewing concerns surrounding the four-semester examination system for Cl...